मीरा बाई कविता (Meerabai - Poem)

 कृष्ण के प्रेम मे दीवानी मीराबाई 

मीराबाई, जोधपुर के राठौड़ रतन सिंह की इकलौती बेटी थीं. बचपन से ही उनका मन कृष्ण भक्ति में रम गया था. यौवन से लेकर मृत्यु तक उन्होंने कृष्ण को ही अपना सब कुछ माना। 

इनका विवाह राणा सांगा के पुत्र भोजराज के साथ हुआ था।  

कविता 

मीरा ने मूरत को जो सुलाया,
तो नटखट जग के सो गया होगा ............

गोद के स्पर्श में मोद को पाकर,
पाहन कोमल हो गया होगा............

मीरा ने प्रेम की बेल जो बोई,
तो कान्हा भी अंकुर बो गया होगा ............

मीरा ने आँसू के मोती सजाए ,
तो कान्हा भी धागा पिरो गया होगा ............

फूलों में सांप को देख के माला में,
धागे सी सांप को सी गई मीरा ............

राणा ने पियाला दिया विष का,
और सोचा अभी के अभी गई मीरा  ...........

मीरा ने विष तो पिया ही नहीं,
ऐसे मौत को मार के जी गई मीरा  ...........

कृष्ण के प्रेम का प्याला है ये ,
रणधार से प्यार को पी गई मीरा  ...........

राधा को कृष्ण की देह मिली,
बिन देह के नेह निभा गई मीरा  ...........

बृज भूमि में कान्हा ने रास रचा,
मरु भूमि में फूल खिला गई मीरा  ...........

कृष्ण ने द्वापर में राधा को गया ,
तो कलयुग में कृष्ण को गया गई मीरा  ...........

कृष्ण के प्रेम का राधा पे कर्ज था ,
राधा का कर्ज चुका गई मीरा  ...........

कृष्ण तो श्याम हैं श्याम हैं काजल,
काजल को आँझ के सो गई मीरा  ...........

श्याम के नाम को ऐसे रटा ,
के गोरी से सांवरी हो गई मीरा  ...........

कंत के पंथ के प्रेम के अश्वों की ,
दृष्टि से सृष्टि भीगो गई मीरा  ...........

उस खेत के रेत में मोती उगे ,
जिस खेत में बैठ के रो गई मीरा  ...........

राणा ने ओझा बुलाया कहा कोई,
भूत या प्रेत है मीरा के भीतर  ...........

गिरधर-गिरधर की रट ले ,
तज घूँघट घूमती है दर-बेदर  ...........

जीभ पे गिरधर का नाम न आ सके ,
मंत्र कोई ऐसे मारिए इस पर  ...........

ओझा ने मीरा की आँखों में झांका ,
तो ओझा भी गया उठा गिरधर - गिरधर  ...........

बांध के घुँघरू जो नाची तो नाची ,
कि नाच को नाच नचा  गई मीरा  ...........

श्याम की मोहिनी मूरत देख के,
मूरत में ही समा गई मीरा  ...........

पीर में नैनों के नीर बहा ,
वसुधा मे सुधा बरसा  गई मीरा  ...........

प्रेम के गीत क्या गाए कोई ,
गाना था जो सब गा गई मीरा  ...........

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