golok dham - गोलोकधाम दर्शन (श्रीकृष्ण एवं श्रीराधिकाजी दर्शन)
गोलोकधाम दर्शन गोलोकधामाधिपतिं परेशं परात्परं त्वां शरणं व्रजाम्यहम् बहुत पहले की बात है - दानव, दैत्य, आसुर स्वभाव के मनुष्य और दुष्ट राजाओं के भार से अत्यन्त पीड़ित हो, पृथ्वी गौ का रूप धारण करके, अनाथ की भाँति रोती-बिलखती हुई अपनी आन्तरिक व्यथा निवेदन करने के लिए ब्रह्माजी की शरण में गई। उस समय उसका शरीर काँप रहा था। वहाँ उसकी कष्टकथा सुनकर ब्रह्माजी ने उसे धीरज बँधाया और तत्काल समस्त देवताओं तथा शिवजी को साथ लेकर वे भगवान नारायण के वैकुण्ठ धाम में गये। वहाँ जाकर ब्रह्माजी ने भगवान विष्णु को प्रणाम करके अपना सारा अभिप्राय निवेदन किया। तब भगवान विष्णु ने कहा - ब्रह्मन्! साक्षात् भगवान श्री कृष्ण ही अगणित ब्रह्माण्डों के स्वामी, परमेश्वर, अखण्डस्वरूप तथा देवातीत हैं। उनकी लीलाएँ अनन्त एवं अनिर्वचनीय हैं। उनकी कृपा के बिना यह कार्य कदापि सिद्ध नहीं होगा, अतः तुम उन्हीं के अविनाशी एवं परम उज्जवल धाम में शीघ्र जाओं। श्रीब्रह्माजी बोले- प्रभो! आपके अतिरिक्त कोई दूसरा भी परिपूर्णतम् तत्व है, यह मैं नहीं जानता। यदि कोई दूसरा भी आपसे उत्कृष्ट परमेश्वर है, तो ...