Vatsasur Udhdhar by Shree Krishan_श्री कृष्णा द्वारा वत्सासुर का उद्धार

श्री कृष्णा द्वारा वत्सासुर का उद्धार एवं पूर्वजन्म की कथा 


नारद जी बोले-
एक दिन उनके बछड़ोंके झुंडमें कंसका भेजा हुआ वत्सासुर आकर मिल गया। श्रीकृष्णको या बात विदित हो गयी और वे उसके पास गये। वर दैत्य गोप-बालकोंके बीचमें सब ओर पूँछ उठाकर बार-बार दौड़ता हुआ दिखायी देता था। उसने अचानक आकर अपने पिछले पैरोंसे श्रीकृष्णके कंधोंपर प्रहार किया। अन्य गोप-बालक तो भाग चले, किंतु श्रीकृष्णने उसके दोनों पैर पकड़ लिये और । उसे घुमाकर धरतीपर पटक दिया। इसके बाद श्रीहरि ने फिर उसे हाथोंसे उठाकर कपित्थ-वृक्षपर दे मारा। फिर तो वह दैत्य तत्काल मर गया। उसके धक्केसे महान् कपित्थ-वृक्षने स्वयं गिरकर दूसरे-दूसरे वृक्षों को भी धराशायी कर दिया। यह एक अद्भुत-सी बात हुई। समस्त ग्वालबाल आश्चर्यसे चकित हो कन्हैयाको वहाँ साधुवाद देने लगे। देवतालोग आकाश में खडे हो जय-जयकार करते हुए फूल बरसाने लगे। उस दैत्यकी विशाल ज्योति श्रीकृष्णमें लीन हो गयी॥
बहुलाश्वने पूछा-
मुने! यह तो बड़े आश्चर्यकी बात है। बताइये तो, इस वत्सासुरके रूपमें पहलेका कौन-सा पुण्यात्मा पुरुष प्रकट हो गया था, जो परिपूर्णतम परमात्मा श्रीकृष्णमें विलीन हुआ?


श्रीनारदजी बोले-
राजन् ! मुरके एक पुत्र था, जो महादैत्य 'प्रमील' के नामसे विख्यात था। उसने देवताओंको भी युद्धमें जीत लिया था। एक दिन वह वसिष्ठ मुनिके आश्रमपर गया। वहाँ उसने मुनिकी होमधेनु नन्दिनीको देखा। उसे पानेकी इच्छासे वह ब्राह्मणका रूप धारण करके मुनिके पास गया और उस मनोहर गौके लिये याचना करने लगा। महर्षि दिव्यदर्शी थे; अत: सब कुछ जानकर भी चुप रह गये, कुछ बोले नहीं। तब गौने स्वयं कहा ॥
श्रीनन्दिनी बोली-
दुर्मते! तू मुरका पुत्र दैत्य है, तो भी मुनियोंकी गौका अपहरण करनेके लिये ब्राह्मण बनकर आया है। अतः गायका बछड़ा हो जा॥
श्रीनारदजी कहते हैं-
राजन्! नन्दिनीके इतना कहते ही वह मुरपुत्र महान् गोवत्स बन गया। तब उसने मुनिवर वसिष्ठ तथा उस गौकी परिक्रमा एवं प्रणाम करके कहा-'मेरी रक्षा कीजिये, रक्षा 'कीजिये'॥
गौ बोली-
महादैत्य! द्वापरके अन्तमें जब तू श्रीकृष्णके बछड़ोंमें घुस जायगा, उस समय तेरी मुक्ति होगी॥
श्रीनारदजी कहते हैं-
उसी शाप और वरदानके कारण परिपूर्णतम पतितपावन साक्षात् भगवान् श्रीकृष्णमें दैत्य वत्सासुर विलीन हुआ। इसमें विस्मयकी कोई बात नहीं है॥


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