importance of bhagavad - स्वयं श्री भगवान के श्री मुख से ब्रह्मा जी को उपदेश

श्रीमद्भागवत् - माहात्म्य


श्रीमद्भागवतं नाम पुराणं लोकविश्रुतम्।
शृणुयाच्छ्रद्धया युक्तो मम सन्तोषकारणम्।।

लोकविख्यात श्रीमद्भागवत नामक पुराण का प्रतिदिन श्रद्धायुक्त होकर श्रवण करना चाहिए। यही मेरे सन्तोष का कारण है।

नित्यं भागवतं यस्तु पुराणं पठते नरः।
प्रत्यक्षरं भवेत्तस्य कपिलादानं फलम्।।

जो मनुष्य प्रतिदिन भागवत पुराण का पाठ करता है, उसे एक-एक अक्षर के उच्चारण के साथ कपिला गौ दान देने का पुण्य प्राप्त होता है।





श्लोकार्धं श्लोकपादं वा नित्यं भागवतोद्भवम्।
पठते शृणुयाद् यस्तु गोसहस्त्रफलं लभेत्।।

जो प्रतिदिन भागवत के आधे श्लोक या चैथाई श्लोक का पाठ अथवा श्रवण करता है, उसे एक हजार गोै दान का फल मिलता है।

यः पठेत् प्रयतो नित्यं श्लोकं भागवतं सुत।
अष्टादशपुराणानां फलमाप्नोति मानवः।।

पुत्र ! जो प्रतिदिन पवित्रचित्त होकर भागवत के एक श्लोक का पाठ करता है, वह मनुष्य अठारह पुराणों के पाठ का फल पा लेता है।


नित्यं मम कथा यत्र तत्र तिष्ठन्ति वैष्णवाः।
कलिबाह्या नरास्ते वै येऽर्चयन्ति सदा मम।।

जहाँ नित्य मेरी कथा होती है, वहाँ विष्णपार्षद प्रह्नाद आदि विद्यमान रहते हैं। जो मनुष्य सदा मेरे भागवतशास्त्र की पूजा करते हैं, वे कलि के अधिकार से अलग हैं, उन पर कलि का वश नहीं चलता।


यच्छन्ति वैष्णवे भक्त्या शास्त्रं भागवतं हि ये।
कल्पकोटिसहस्त्राणि मम लोके वसन्ति ते।।

जो लोग विष्णभक्त पुरूष को भक्तिपूर्वक भागवतशास्त्र समर्पण करते हैं, वे हजारों करोड़ कल्पों तक मेरे वैकुण्ठधाम में वास करते हैं।

श्लोकं भागवतं चापि श्लोकार्धं पादमेव वा।
लिखितं तिष्ठते यस्य गृहे तस्य वसाम्यहम्।।

जिसके घर में एक श्लोक, आधा श्लोक अथवा श्लोक का एक ही चरण लिखा रहता है, उसके घर में मैं निवास करता हूँ।

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